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काबे पर चढ़ाया गया नया गिलाफ़, 670 किलो शुद्ध रेशम और 120 किलो सोने व 100 किलो चांदी से तैयार होता है “गिलाफ़ ए काबा”।

रियाद: सऊदी अरब में मुकद्दस मस्जिदों के प्रशासन ने रविवार और सोमवार की रात 9 ज़ुल-हिज्जा के बीच पुराना काबातुल्लह का गिलाफ़़ (Important Black Cover) उतार कर काबा पर नया गिलाफ़ चढ़ा दिया है। काबा का गिलाफ़ बदलने का काम 200 कारीगरों की मदद से किया गया। हर साल जुल-हिज्जा की 9 तारीख को काबा का गिलाफ़ बदलने की रस्म निभाई जाती है।

काबा के नए गिलाफ़ में चार बराबर धारियां और एक सतार अल-बाब होता है। काबा के चारों ओर की पट्टियाँ अलग से तैयार की जाती हैं। गिलाफ़ परिवर्तन प्रक्रिया के दौरान, पहले एक हिस्से को हटा दिया जाता है। इसे एक नए कवर से बदल दिया जाता है। फिर दूसरे, तीसरे और चौथे भाग को हटा दिया जाता है और उसी क्रम में एक नया गिलाफ़ लगाया जाता है।

सबसे पहले अल-हातिम की तरफ से काबा का गिलाफ़ खोला जाता है और उसके स्थान पर एक नया गिलाफ़ लगाया जाता है। काबा का गिलाफ़ ऊपर से नीचे तक फैला हुआ है। काले पत्थर के ऊपर काबा के बाहरी पर्दे पर ‘अल्लाहु अकबर’ शब्दों के साथ पांच कंदीलें हुजराए अस्वाद के उपर बाहरी हिस्से पर लगाई जाती हैं।

सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए के मुताबिक, डॉ. साद अल-मुहम्मद ने कहा कि काबा के गिलाफ़ में चार भाग होते हैं जबकि पांचवां बाब ए काबा का पर्दा होता है। गिलाफ़ ए काबा किंग अब्दुल अज़ीज़ कॉम्प्लेक्स में 200 कुशल कर्मचारी तैयार करते हैं। कारखाने में कई विभाग हैं। रंगाई, बुनाई, कढ़ाई, छपाई, सिलाई के अलावा, बेल्ट और सुनहरे धागे के साथ काम होता हैं।

काबा के गिलाफ़ के विभिन्न टुकड़ों को सिलने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीन दुनिया की सबसे बड़ी सिलाई मशीन है।और यह 16 मीटर लंबी है जो कंप्यूटर सिस्टम के तहत काम करती है।

काबा का गिलाफ़ बनाने में 670 किलो शुद्ध रेशम का उपयोग किया जाता है। इसे परिसर के अंदर काले रंग से रंगा गया है। इसमें 120 किलोग्राम सोना और 100 किलोग्राम चांदी के तार का इस्तेमाल होता है। काबा के गिलाफ़ की पट्टी में सोलह टुकड़े होते हैं। बेल्ट के नीचे बारह कंदीलें बनाई जाती हैं। ब्लैक स्टोन के ऊपर के हिस्से पर पांच कंदीलों में ‘अल्लाह अकबर’ खुदा हुआ है। इसके अलावा काबा के बाहरी पर्दे भी होता है। यह काम खूबसूरती से किया गया है