उत्तर प्रदेश चुनाव राज्य

बंगाल के बाद यूपी के पंचायत चुनाव में भी पिछड़ रही है बीजेपी, PM मोदी और CM योगी के क्षेत्र में भी भारी नुकसान, वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन का असर।

लखनऊ: पश्चिम बंगाल के बाद बीजेपी को यूपी में झटका लगा है जहां पंचायत चुनाव में पीएम मोदी और सीएम योगी के क्षेत्र पूर्वांचल में पार्टी के कई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा है। वही वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन के चलते बीजेपी को भारी नुकसान हुआ है जहां कई जिलों में बीजेपी का सफाया हो गया है तो व वही किसान आंदोलन आरएलडी के लिए संजीवनी बन कर सामने आया है आरएलडी को कई सीटों पर कामयाबी मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी के संसदीय इलाके पूर्वांचल में कई दिग्गजों को पंचायत चुनाव में करारा झटका लगा है। चुनावी मैदान में उतरे परिवार के लोगों को हार का सामना करना पड़ा है। हार का सामना करने वालों में भाजपा के दिग्गज ज्यादा हैं। सपा नेताओं को भी झटका लगा है। हालांकि कुछ राजनेताओं के परिवार में जीत के बाद खुशियां भी आई हैं।

मिर्जापुर में एससी एसटी आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष युवा भाजपा नेता मनीराम कॉल जिला पंचायत सदस्य का चुनाव बुरी तरह हार गए। वह तीसरे स्थान पर चले गए।

आजमगढ़ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमप्रकाश राय के भाई हरिप्रकाश राय और भतीजा आकाश राय जिला पंचायत सदस्य समेदा औऱ ग़ज़हरा से चुनाव हार गए हैं। उन्ही के भाई ओमप्रकाश राय भी सठियांव से प्रधान पद हार गए।

देवरिया में सलेमपुर से भाजपा विधायक काली प्रसाद की पत्नी और भतीजा बीडीसी का चुनाव हार गए। बलिया में सपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के बेटे रंजीत चौधरी जिला पंचायत का चुनाव हार गए हैं। भाजपा गोरक्ष प्रांत के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र यादव भी चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह व सचिदानन्द तिवारी को भी हार का सामना करना पड़ा है।

गाजीपुर में पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह की पत्नी अंजना सिंह जिला पंचायत चुनाव हार गई। बलिया में पूर्व मंत्री व दिग्गज नेता अम्बिका चौधरी के बेटे आनंद चौधरी चुनाव जीत गए हैं।

आज़मगढ़ में ठेकमा से बसपा समर्पित जिला पंचायत प्रत्याशी संध्या सिंह चुनाव जीत गई हैं। वह बाहुबली भूपेंद्र सिंह मुन्ना की पत्नी हैं। आज़मगढ़ में पूर्व मंत्री और सदर विधायक दुर्गा यादव के बेटे विजय यादव ने बड़ी जीत दर्ज की है। उन्होंने सेठवल जिला पंचायत क्षेत्र से निकटतम प्रत्याशी अरुण मिश्रा को मात दी है।

उधर, मेरठ समेत पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का पंचायत चुनाव में साफ असर दिखा। भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। वहीं रालोद को संजीवनी मिली। बसपा, सपा के प्रति भी मतदाताओं का झुकाव दिखा। मेरठ में मवाना-हस्तिनापुर, दौराला में भाजपा का खाता भी नहीं खुला। अन्य इलाकों में भी कांटे की टक्कर है। वैसे जिला पंचायत के चुनाव में साफ दिख रहा है कि आम लोग सत्ता से नाराज हैं। पहली बार भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद ने समर्थित प्रत्याशियों की घोषणा की। यह दलगत घोषणा भाजपा के लिए ठीक नहीं रही।

इसी तरह स्थिति सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़ और बिजनौर में भी है। सहानपुर में इस बार भाजपा फायदे में दिख रही है, जबकि बसपा और कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। 49 सीटों में से भाजपा छह पर जीत चुकी है और 10 पर आगे चल रही है, जबकि पिछली बार छह सीटें ही थीं।

शामली में रालोद ने भाजपा को लगभग घुटनों पर ही ला दिया है। भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रदेश राज्यमंत्री के गृह जनपद के होने के बावजूद 19 सीटों में 8 सीटों पर रालोद जीत दर्ज करा चुकी है, जबकि भाजपा मात्र 6 सीटों पर सिमट गई है। इसके अलावा सात निर्दलीय भी जीत की ओर हैं।

बुलंदशहर में भाजपा 10 सीटें लेकर आगे जरूर है लेकिन बागियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लगभग सात सीटें जीती हैं। वहीं बसपा 6, सपा और रालोद 4-4 सीटों पर आगे चल रही हैं। मुजफ्फरनगर में भीम आर्मी के चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने तीन सीटें जीतकर चौंका दिया है। भाजपा के 13 प्रत्याशी जीत की ओर हैं। रालोद का प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा। वहीं भाकियू जिलाध्यक्ष की पत्नी भी चुनाव हार गईं। बसपा चार सीट पर आगे हैं।

जाटलैंड में किसान आंदोलन का असर महसूस किया जा रहा है। बागपत और मथुरा में भाजपा पिछड़ती नजर आ रही है। हालाँकि, कई जिलों के रुझान आने बाकी हैं। अगर हम बागपत और मथुरा की बात करें तो यह जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में संकेत दे रहा है कि भाजपा जाटलैंड में हार रही है, बल्कि आरएलडी के अजीत सिंह की पार्टी भी उसी गति से जाटों के बीच मैदान बना रही है।

बागपत और मथुरा और मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और अलीगढ़ के जाट इलाकों में भी यही सिलसिला जारी रहा, अगर भाजपा पंचायत चुनाव हारती है, तो मान लीजिए कि किसानों ने भाजपा को जाट मुसलमानों को एकजुट करने के लिए खेला है।

हालांकि सारेे परिणाम अभी भी घंटों दूर हैं। लेकिन बागपत और मथुरा के जाट-बहुल इलाके संकेत दे रहे हैं कि किसान आंदोलन के बाद भाजपा का बहुत नुकसान हुआ है। यह पता चला है कि आरएलडी बागपत की अधिकांश सीटों पर आगे चल रही है और बीजेपी बहुत पीछे है। आरएलडी मथुरा में आधी सीटों पर आगे है और भाजपा यहां भी बहुत पीछे है लेकिन यह अंतिम परिणाम नहीं है।

भाजपा को उम्मीद है कि अंतिम परिणाम रुझानों के बाद सामने आएंगे, जिसमें भाजपा जाटलैंड में भी अपनी ताकत बनाए रखने में सक्षम होगी। हालांकि, पार्टी नेता इस मामले पर टिप्पणी करने के लिए तैयार नहीं है और अंतिम परिणामों की प्रतीक्षा करना चाहता है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस बार भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेषकर जाट-प्रभावित क्षेत्रों में बहुत परेशानी में है और इस समस्या का एकमात्र कारण कृषि संबंधी कानून और किसान आंदोलन है।

जानकारों के मुताबिक, इस बार के पंचायत चुनावों में जाट और मुस्लिम वोट भी कई जगहों पर एक साथ दिख रहे हैं और यह फिलहाल भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की प्रचंड जीत और भाजपा की करारी हार के बाद, अगर भाजपा वेस्ट यूपी के जाटलैंड में भी हार जाती है, तो यह भविष्य की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश होगा। बता दें कि पूरे उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में समाजवादी पार्टी भाजपा को तगड़ा झटका दे रही है और ये चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

इनपुट्स live Hindustan से भी।